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NTPC की कोयला ढुलाई से ग्रामीण परेशान, बंद सड़क पर ट्रांसपोर्टिंग शुरू कराने पहुंचे एनटीपीसी के अधिकारी।

NTPC की कोयला ढुलाई से ग्रामीण परेशान, बंद सड़क पर ट्रांसपोर्टिंग शुरू कराने पहुंचे एनटीपीसी के अधिकारी। केरेडारी/अशोक बंटी राज केरेडारी। एन...

NTPC की कोयला ढुलाई से ग्रामीण परेशान, बंद सड़क पर ट्रांसपोर्टिंग शुरू कराने पहुंचे एनटीपीसी के अधिकारी।


केरेडारी/अशोक बंटी राज


केरेडारी। एनटीपीसी केरेडारी कोयला खनन परियोजना से हो रही कोयला ढुलाई से जोरदाग, पगार, चट्टीबारियातु और पेटो गांव के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी विकास के नाम पर दावे तो कर रही है, लेकिन विस्थापित-प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं, सड़क मरम्मत और धूल नियंत्रण की स्थिति संतोषजनक नहीं है। बताया जाता है कि जोरदाग से लावनिया मोड़ तक ग्रामीण सड़क पर पूर्व में भी कोयला ढुलाई को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया था। इसके बावजूद उक्त सड़क से दोबारा ट्रांसपोर्टिंग शुरू कराने की कवायद की जा रही है। शुक्रवार को केरेडारी कोल माइंस के जीएम, एजीएम अमित कुमार, एसपी गुप्ता, रोहित पाल और डिस्पैच अधिकारी सुधीर कुमार समेत अन्य अधिकारी सड़क का जायजा लेने पहुंचे।

डिस्पैच अधिकारी की भूमिका पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल


ग्रामीणों ने डिस्पैच अधिकारी सुधीर कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी सहमति से ट्रांसपोर्टरों को उक्त ग्रामीण सड़क से कोयला ढुलाई की अनुमति दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क की स्थिति और धूल की समस्या को लेकर पहले से परेशानी है, तो फिर उसी मार्ग पर भारी वाहनों का परिचालन क्यों कराया जा रहा है।


 वैकल्पिक मार्ग से कोयला ढुलाई की मांग


ग्रामीणों के अनुसार भारी वाहनों के परिचालन से सड़क पर दिनभर धूल उड़ रही है। नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी और ट्रांसपोर्टरों की ओर से सड़क मरम्मत तथा धूल नियंत्रण के लिए अपेक्षित पहल नहीं की गई है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रांसपोर्टिंग से प्रभावित गांवों के स्थानीय लोगों को रोजगार में पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सड़क की मरम्मत, नियमित पानी का छिड़काव और स्थानीय लोगों को रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं, तो फिर किस विकास के नाम पर लगातार कोयला ढुलाई कराई जा रही है।

सबसे गंभीर स्थिति सड़क किनारे बसे प्रभावित ग्रामीणों की है। बताया जाता है कि विस्थापन के बाद प्रभावित परिवारों के 200 से अधिक लोग इसी सड़क के किनारे घर बनाकर रह रहे हैं। ऐसे में यदि इस ग्रामीण सड़क से बड़े पैमाने पर कोयला ढुलाई शुरू होती है, तो धूल, भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ सकती है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण सड़क से किसी भी कीमत पर कोयला ढुलाई नहीं होने दी जाएगी। साथ ही एनटीपीसी से वैकल्पिक मार्ग से कोयला परिवहन करा ने की मांग की गई है।

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