NTPC के लिए 1839 एकड़ जमीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन, ग्रामीणों में आक्रोश। “शर्तें नहीं मानी तो एनटीपीसी को एक इंच जमीन नहीं देंगे” केरेडारी...
NTPC के लिए 1839 एकड़ जमीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन, ग्रामीणों में आक्रोश।
“शर्तें नहीं मानी तो एनटीपीसी को एक इंच जमीन नहीं देंगे”
केरेडारी हजारीबाग
अशोक बंटी राज
NTPC की चट्टी बारियातु कोयला खनन परियोजना के दक्षिणी क्षेत्र के विस्तार के लिए केरेडारी प्रखंड के 11 गांवों की कुल 1839.14 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। भारत के राजपत्र में अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद प्रभावित गांवों में आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों ने अधिकारों की गारंटी, उचित मुआवजा और लिखित समझौते के बिना जमीन देने से इनकार किया है। नोटिफिकेशन के अनुसार भदईखाप की 176.18, बुकरू की 4.74, चट्टी बारियातु की 112.63, जोरदाग की 665.69, कराली की 33.83, केरेडारी की 18.88, खापिया की 53.45, लोयसुकवार की 182.48, ओमे की 357.41, पगार की 171.81 और पेटो की 62.50 एकड़ जमीन अधिग्रहण के दायरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास की एनटीपीसी परियोजनाओं में विस्थापन, मुआवजा, रोजगार और प्रदूषण से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। पुराने प्रभावित परिवारों के लंबित मुआवजे और रोजगार का समाधान किए बिना नई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय सांसद से भी पुराने विस्थापितों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि “पहले पुराने विस्थापितों का हिसाब चुकता करो, फिर नई जमीन मांगो।”
16 सूत्री मांगों पर लिखित समझौते की मांग,
ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण से पहले 16 सूत्री मांगों पर लिखित एवं कानूनी समझौते की मांग की है। इनमें जमीन के बदले स्थाई नौकरी, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, जमीन के बदले जमीन, चार गुना मुआवजा, प्रभावित लोगों को टेंडर में प्राथमिकता, स्कूल, अस्पताल व इंजीनियरिंग कॉलेज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ग्रामीणों ने खनन कार्य एनटीपीसी द्वारा स्वयं कराने, एमडीओ को जिम्मेदारी नहीं देने, स्थानीय युवाओं को रोजगार व कौशल विकास का अवसर देने तथा परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की है। दुर्घटना में मौत होने पर आश्रित को नौकरी, आजीवन पेंशन और पांच करोड़ रुपए की सहायता की मांग भी ग्रामीणों ने रखी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि पहले पुराने विस्थापितों को न्याय, लंबित मुआवजे का भुगतान और अधिकारों की गारंटी दी जाए। 16 सूत्री मांगों पर लिखित समझौते के बाद ही जमीन अधिग्रहण पर बातचीत होगी, अन्यथा एनटीपीसी को एक इंच जमीन नहीं देंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट हजारीबाग


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