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विंध्यवासिनी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

विंध्यवासिनी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पदमा, हजारीबाग।  Ashok Banty Raj   पदमा स्थित मां विंध्यवासिनी कॉलेज ऑफ़ एजुक...

विंध्यवासिनी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन


पदमा, हजारीबाग। 

Ashok Banty Raj 


पदमा स्थित मां विंध्यवासिनी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में महाविद्यालय के IQAC सेल, सम्मति एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया तथा हरिप्रिया एकेडमिक सपोर्ट सर्विसेज के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 - भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण (NEP 2020: Integration of Indian Knowledge System and Artificial Intelligence)" था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात, प्राचार्य डॉ. चेतलाल प्रसाद ने स्वागत भाषण दिया। महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार मेहता, सचिव डॉ. हरि कुमार, उपसचिव अजीत कुमार एवं निदेशक रवि प्रकाश द्वारा अतिथियों को मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. प्रियंका कुमारी ने विषय प्रवेश कराते हुए अतिथियों एवं मुख्य वक्ताओं का परिचय कराया।

डॉ. सी. बी. शर्मा (मुख्य अतिथि) ने कहा कि ज्ञान का सृजन गुरुकुल परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के केंद्र में शिक्षक हैं और हमारी परंपरा में केवल अपनी नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की चिंता की गई है।

   डॉ. आशीष श्रीवास्तव, मुख्य वक्ता - डीन, (IUCTE-BHU) ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को समझने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे लिए वरदान है या अभिशाप, यह पूरी तरह हमारे इसके उपयोग पर निर्भर करता है। डॉ. रतन मोहन झा (निदेशक, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली) ने ज्ञान मीमांसा और AI के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वदेशी AI की आवश्यकता है। शिक्षा में बहुविषयता (Multidisciplinarity) हमारी पारंपरिक शिक्षा की प्रमुख विशेषता रही है। प्रो. (डॉ.) आर. जे. मुरली कृष्णा (रजिस्ट्रार, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली) ने कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़कर भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के सामंजस्य पर अपने विचार रखे। डॉ. अमिता कुमारी (सहायक प्रोफेसर, विनोबा भावे विश्वविद्यालय) ने कहा कि वर्तमान में 'AI की बारिश' हो रही है, इसलिए इसे सही तरीके से अपनाने की पात्रता विकसित करनी होगी। AI के प्रयोग में तर्क आवश्यक है और पाणिनी के व्याकरण एवं कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स के संबंधों को रेखांकित किया।

    डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह (CCDC) ने NEP 2020 के प्रमुख बिंदुओं और उसके क्रियान्वयन पर जोर दिया। डॉ. सादिक रज़ाक (प्रॉक्टर) ने तकनीक के विवेकपूर्ण और नियंत्रित प्रयोग पर बल दिया।

  इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रांतों एवं विश्वविद्यालयों से आए प्राध्यापकों, प्राचार्यों, शोधार्थियों एवं प्रशिक्षुओं ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए कार्यक्रम का मंच संचालन प्रशिक्षु मनीष यादव ने कुशलतापूर्वक किया। संगोष्ठी के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन संयोजिका डॉ. प्रियंका कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया।


ब्यूरो रिपोर्ट हजारीबाग 

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