FALSE

Grid

GRID_STYLE
FALSE
TRUE

Breaking News

latest

ठाकुर समाज ने श्मशान घाट पर कफन की परंपरा के बजाय नकद राशि देने की एक अनूठी और सराहनीय पहल शुरू की,

  ठाकुर समाज ने श्मशान घाट पर कफन की परंपरा के बजाय नकद राशि देने की एक अनूठी और सराहनीय पहल शुरू की, केरेडारी हजारीबाग अशोक बंटी राज हजार...


 ठाकुर समाज ने श्मशान घाट पर कफन की परंपरा के बजाय नकद राशि देने की एक अनूठी और सराहनीय पहल शुरू की,


केरेडारी हजारीबाग
अशोक बंटी राज

हजारीबाग जिला केरेडारी प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत बारियातु गुरगुटिया में धनेश्वर ठाकुर की आकस्मिक निधन हो गया। गंगा लाभ 05 अगस्त 2026 दिन मंगलवार को अग्नि संस्कार किया गया। इस दौरान ठाकुर समाज के द्वारा एक अनोखी पहल किया गया। जिससे समाज की एक अलग पहचान बना। ठाकुर समाज द्वारा श्मशान घाट पर कफन के स्थान पर नगद राशि देकर शोक-संतप्त परिवार को आर्थिक सहयोग करने और एक नई संस्था का गठन किया गया। जिससे दु:खी परिवार को आर्थिक संबल मिलता है। और यह एक अनूठी सामाजिक पहल की है, जो परंपराओं में सकारात्मक सुधार और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देती है। इस दौरान अशोक ठाकुर ने अपने समाज के लोगो को कहा कि इस पहल को हमलोग सुचारू रूप से चलाने की प्रयास करेंगे। और समाज की इक अलग पहचान देंगे। ताकि इस समाज को देख कर अन्य समाज भी इस अनोखी पहल की समर्थन करें। और अपने समाज में ये पार्था को पालन करे। इस पहल से पीड़ित परिवार पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होता है।सामाजिक एकजुटता यह कदम संकट की घड़ी में समाज की एकजुटता और संवेदना को मजबूत करता है। वही दूर दराज से आए जैसे टंडवा, बरकाकाना, रामगढ़, हजारीबाग, बड़कागांव, सिकरी, रांची सहित गांव के रिश्तेदारो ने भी इस अनोखी पहल की सरहाना की।  इस पहल और संगठन को चलाने में अशोक ठाकुर, रघु ठाकुर, बाबूलाल ठाकुर, विकाश ठाकुर, दशरथ ठाकुर, उमेश ठाकुर, समर्थन किया।



*इस पहल के मुख्य बिंदु*

* अंतिम संस्कार के समय पारंपरिक कफन या अन्य सामग्री देने की जगह सीधे नगद राशि देकर परिवार को व्यावहारिक और आर्थिक संबल का सीधा सहयोग करना।

* संगठन का निर्माण किया गया, इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और समाज में एकता बनाए रखने के लिए एक विशेष संस्था या समिति की स्थापना किया गया।

* इस पारदर्शी सहायता से अब सुनिश्चित हो गया कि हर जरूरतमंद परिवार को समय पर उचित आर्थिक मदद और समर्थन करना है।

* अंतिम संस्कार के समय पारंपरिक कफन या वस्त्र लाने के बजाय सीधे आर्थिक सहयोग करना हैं।


ब्यूरो रिपोर्ट हजारीबाग 

No comments


अपना विज्ञापन बॉक्स लगवाएं