ऊर्जा सुरक्षा के साथ सामाजिक विकास का मॉडल चट्टी–बरियातू कोयला परियोजना केरेडारी हजारीबाग Ashok Banty Raj भारत के विकास की गति ऊर्जा उपलब...
ऊर्जा सुरक्षा के साथ सामाजिक विकास का मॉडल चट्टी–बरियातू कोयला परियोजना
केरेडारी हजारीबाग
Ashok Banty Raj
भारत के विकास की गति ऊर्जा उपलब्धता पर निर्भर करती है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के बावजूद, कोयला आज भी देश की बिजली व्यवस्था का आधार बना हुआ है। ऐसे में चुनौती यह नहीं है कि कोयले की आवश्यकता है या नहीं, बल्कि यह है कि इसे कितनी जिम्मेदारी से निकाला जाए। झारखंड के नॉर्थ करणपुरा कोयला क्षेत्र में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की चट्टी–बरियातू कोयला खनन परियोजना इस संतुलन का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। 7 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाली यह परियोजना उत्पादन, पर्यावरण और सामाजिक दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करती है। परियोजना ने तेजी से कार्य करते हुए 25 अप्रैल 2022 को ओवरबर्डन हटाने का कार्य शुरू किया। 29 सितंबर 2022 को कोयला उत्पादन प्रारंभ हुआ और 15 नवंबर 2022 से कोयले का प्रेषण भी शुरू हो गया। वर्तमान में यहाँ से कोयला एनटीपीसी नॉर्थ करणपुरा और बाढ़ परियोजनाओं में भेजा जाता है, जहाँ कोयले से बिजली उत्पादन के पश्चात बिजली देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुँचाई जाती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल रही है। वित्त वर्ष 2025–26 में परियोजना ने 4.887 मिलियन टन कोयला उत्पादन और 4.935 मिलियन टन प्रेषण (डिस्पैच) हासिल किया, जो निरंतर प्रगति को दर्शाता है। रिकॉर्ड रेक मूवमेंट और 2000वें रेक के सफल प्रेषण जैसी उपलब्धियाँ इसकी परिचालन क्षमता को दर्शाती हैं।



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