पूर्व मंत्री का विवादित बयान से सीबी एवं केडी परियोजना के अधिकारियों में भय का माहौल। क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल मांग पूरी नहीं होने पर...
पूर्व मंत्री का विवादित बयान से सीबी एवं केडी परियोजना के अधिकारियों में भय का माहौल।
क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल मांग पूरी नहीं होने पर अधिकारियों को दी धमकी, कहा-तीर- धनुष से सेंदरा कर देंगे।
केरेडारी हजारीबाग
Ashok Banty Raj
केरेडारी : पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। एनटीपीसी के अधिकारियों को लेकर तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। 11 फरवरी को जब पूर्व मंत्री योगेंद्र साव धरने में बैठे रैयतों के पास पहुंचे। जहां पर एनटीपीसी चट्टी बरियातू में लगभग 43 दिन वही केरेडारी कोयला खनन परियोजना में लगभग 21 दिनों से आंदोलन चल रहा हैं। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने मीडिया के समक्ष एनटीपीसी कंपनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि एनटीपीसी के अधिकारी थाना के माध्यम से रैयतों को झूठे मुकदमों में फसाकर नोटिस भेजने का काम कर रहे हैं। हम प्रशासन के खिलाफ तो नही जाएंगे क्योंकि वे हमारे ही एक अंग हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि अधिकारियों में साहस है तो वे आमने-सामने आकर रैयतों से बात करें, न कि प्रशासन को आगे कर भय का माहौल बनाएं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि
यदि यही स्थिति बनी रही तो रैयतों का सब्र टूट सकता है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सीधा शब्दों में कहा कि अगर अब रैयतों के भीतर हिम्मत लौट आई है और यदि अधिकारी बसरिया कार्यालय, कार्यालय अथवा सीबी कार्यालय आते हैं तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए, अन्यथा सेंदय होना तय है। उनके इस बयान को लेकर कई लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों का कहना है कि एक जिम्मेदार राजनीतिक व्यक्ति को इस तरह के उग्र और हिंसात्मक शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। इस बयान के बाद क्षेत्र में पूर्व मंत्री की छवि एक दबंग नेता के रूप में उभरती दिख रही है, वहीं एनटीपीसी के अधिकारियों में भय और असमंजस का माहौल बताया जा रहा है। वही इस धमकी से एनटीपीसी के अधिकारी दहशत में हैं। एनटीपीसी के सीबी माइंस के एजीएम स्वाइन नील माधव ने कहा कि जब से इस बात की धमकी मिली है हमारे पदाधिकारी माइंस क्षेत्र में ड्यूटी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वही राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं, बल्कि सामाजिक तनाव को भी बढ़ावा देते हैं। फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट हजारीबाग
9835533100


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